Make Money Online From Influencer Marketing – Best Online Business

यह है आयुष शुक्ला, है विराज सेठ एं, और है नील गोयल एं, और मुझे यकीन है कि इन तीनों में से किसी को नहीं जानते होंहोंगे,किन ट्रैक्शन वेबसाइट की मानें तो लास्ट ईयर इन लोगों ने इतना रिवरेवेन्यूया है है। द क्वेश्चन इज इज, लोग ना तो कोई फेमस सेलिब्रिटी है हैं ना ही कोई फेमस क्रिक्रिएटर, ये लोग इतना कमा कैसे रहे हैंहैं? सारे लोग इन्फ्लुइन्फ्लुएंसर मार्केटर। इन्फ्लुइन्फ्लुएंसरर्केटिंग अभी के टाइम पे वन ऑफ द इज़िएस्ट एंड मोस्ट हॉट बिज़नेस है क्रिएटर इकॉनमी के अंदर। एंड अभी भी इसके अंदर कंपटीशन इतना कम है कि आप यहां पे बहुत इज़ली सक्सेसफुल हो सकते हो। एंड इसके लिए आपको कोई स्पेशल स्किल की भी जरूरत नहीं है। आज के वीडियो में मैं आप लोगों को यही बताने वाला हूं कि इन्फ्लुइन्फ्लुएंसरर्केटिंग बिज़नेस है क्याक्या। कैसे स्टार्ट किया जाता है एंडऔरसे इसे ग्रो कर सकते हो।हो? वीडियो एक पूरा रोड मैप होने वाला है बिगिनर टू एडवांस लेवल का का, पे मैं आपको स्टेप बाय स्टेप बताऊंगा कि कब-कब क्या-क्या करना है। सो बिना किसी देरी के शुरू करते हैं प्योर बेसिक से। व्हाट इज इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग? Okay. सो जिन लोगों को नहीं पता उनको इजी वे में समझा देता हूं। इन्फ्लुएंसर मार्केटर बेसिकली एक मिडिलमैन होता है जिसका काम होता है क्रिएटर एंड ब्रांड्स को मिलाना ताकि ब्रांड्स क्रिएटर्स को स्पॉनसरशिप देके अपनी अवेयरनेस और सेल इंक्रीज कर सकें एंड क्रिएटर ब्रांड के लिए कंटेंट बना के पैसे कमा सके। सुनने में यह नॉर्मल सी चीज लग रही है, एंड आई एम श्योर आप लोग सोच रहे होंगे कि इसके लिए मिडिलमैन मैन की क्या जरूरत है? वेल बहुत ही सिंपल सा आंसर है। क्रिएटर अपने कंटेंट क्रिएशन के प्रोसेस में इतना बिजी होता है कि उसके पास टाइम नहीं है कि वो जाके ब्रांड्स को ढूंढे फिर उनको मनाए एंड देन उनसे पैसे लेके उनके लिए काम भी करें। एंड काम हो जाने के बाद दोबारा से सेम प्रोसीजर को रिपीट करें। एंड साथ ही इन सबके बीच में जो लीगल एग्रीमेंट्स वगैरह होते हैं उनका भी ध्यान रखें। वहीं ब्रांड्स के पास भी नॉलेज नहीं होती है कि उनको किस तरह के क्रिएटर पे स्पेंड करना चाहिए। किस क्रिएटर को कितना पे करना चाहिए एंड उनसे क्या एक्सपेक्ट किया जा सकता है। एंड इवन क्रिएटर को रीच करके उनसे नेगोशिएशन भी कैसे करें। ब्रांड्स को भी इन चीजों में प्रॉब्लम आती है क्योंकि ब्रांड्स के पास भी अपना खुद का काम है जो कि उनको कैरी आउट करना है। एंड इन्हीं प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के लिए चाहिए होता है मिडिल बैंड जो कि है इन्फ्लुएंसरर मार्केटर जो कि क्रिएटर को ढूंढता है। उनको ब्रांड डील्स ला के देता है एंड नेगोशिएशन एंड डील क्लोजिंग का सारा काम करता है और साथ ही एक लॉन्ग टर्म रिलेशन भी बिल्ड करता है ब्रांड्स के साथ एंड इन्फ्लुएंसर्स के बीच ताकि दोनों का म्यूचुअल बेनिफिट हो और इन सबके बीच में इन्फ्लुएंसरर मार्केटर अपना कमीशन लेता है। एक इन्फ्लुएंसरर मार्केटर अलग-अलग स्टेजेस पे अलग-अलग वे में कमीशन लेता है। अगर आप एक सोलो इन्फ्लुएंसरर मार्केटर हो यानी कि जो कि अकेले काम कर रहा है जिसकी कोई पास क्रेडिबिलिटी नहीं है और ना ही कोई ट्रैक है तो आप कंपनी से कमीशन चार्ज नहीं कर सकते हो। आपको क्रिएटर से ही कमीशन लेना पड़ेगा। लेकिन अगर आप एक एजेंसी स्टार्ट कर लेते हो इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग की एंड आपके पास पास क्रेडिबिलिटी भी है तो आप डायरेक्टली ब्रांड से पूरा कैंपेन का पैसा एक बार में ले सकते हो। एंड देन इन्फ्लुएंसर्स को थोड़ा-थोड़ा बांट के अपना मोटा कमीशन बचा सकते हो। यह चीज बी टू बी कैटेगरी के अंदर आ जाएगी जो कि मैं वीडियो में आगे सिखाऊंगा। लेकिन मैं प्योर बेसिक से कवर करते हुए आगे बढूंगा। यानी कि आप लोग एज अ सिंगल पर्सन कैसे यह काम कर सकते हो? मैं आपको पहले यह सिखाऊंगा। हाउ टू स्टार्ट। इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग स्टार्ट करने के लिए आपको पांच स्टेप्स को फॉलो करना पड़ेगा। जिसमें से सबसे पहला स्टेप है चूजिंग एन इंडस्ट्री। अगर आज आपको कोई फैशन इंडस्ट्री का ब्रांड मिल जाए तो आप उसकी डील टेक वाले बंदे से नहीं करवा सकते हैं। जस्ट बिकॉज़ वो टेक वाला क्रिएटर आपकी पहचान में है। और आप यह भी नहीं कर सकते कि जल्दी से कोई फैशन वाला क्रिएटर ले आता हूं एंड बाद में दोबारा से टेक वाले के लिए काम कर लूंगा। अगर आप इस वे में इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग करने की कोशिश करोगे तो आपकी हालत धोबी घाट के कुत्ते जैसी हो जाएगी जो कि ना तो घर का बचेगा ना ही घाट का। एंड मैक्सिमम बिगिनर्स यही गलती करते हैं। इसी इंडस्ट्री में घुसते ही उनको इतना पैसा दिखता है कि वह किसी भी डील को छोड़ना नहीं चाहते हैं। एज अ रिजल्ट वो किसी भी इंडस्ट्री के अंडर क्रेडिबिलिटी नहीं बना पाते हैं। लॉन्ग टर्म गेम नहीं खेल पाते हैं और कुछ ₹1000 ही कमा के गायब हो जाते हैं। जबकि एक्चुअल में यह इंडस्ट्री काफी बड़ी है। तो अब क्वेश्चन यह आता है कि इंडस्ट्री चूज़ करें कैसे? इसके लिए आपको सिंपली थ्री सी फिट फ्रेमवर्क चेक करना है। जहां पे पहला सी का मतलब है कयोसिटी। यानी कि ऐसी कौन सी इंडस्ट्री है जिसके अंदर आप जेनुइनली इंटरेस्टेड हो जिसके बारे में आपको ऑलरेडी थोड़ी सी नॉलेज है। यानी कि आपको पता होना चाहिए कि उस इंडस्ट्री में कौन से ब्रांड्स हैं, कौन से इन्फ्लुएंसर्स टॉप पे है, क्या-क्या नया चलता रहता है उस इंडस्ट्री के अंदर। एवरीथिंग। अगर आप लोगों को ऑलरेडी इस चीज की नॉलेज नहीं है तो कोई प्रॉब्लम नहीं है। आपको बस एक ऐसी इंडस्ट्री ढूंढनी है जिसके बारे में यह चीजें सीखने में आप इंटरेस्टेड हो। आपका काम आसान हो जाएगा। दूसरे सी का मतलब है कैपेबिलिटी। अगर इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग में घुस रहे हो तो मैं प्रेफर करूंगा कि एक लॉन्ग टर्म विज़न लेके चलो। एंड लॉन्ग टर्म में आपको एक सवाल खुद से पूछना ही पड़ेगा कि जिस इंडस्ट्री को आपने चूज़ किया है, यहां पर ब्रांड्स को या इनफ्लुएंसर्स को आप ऐसा क्या प्रोवाइड कर सकते हो जो इनके पास नहीं है। यह इंफॉर्मेशन हो सकती है, डाटा हो सकता है, मार्केटिंग टेक्निक्स हो सकती है या कुछ भी हो सकता है। लेकिन यह लॉन्ग टर्म गेम के लिए जरूरी है। बिगिनिंग स्टेज में ऑब्वियसली आपके पास इसका आंसर नहीं होगा। तो अभी के लिए आप इसे इग्नोर कर सकते हो। लेकिन अगर एक लॉन्ग टर्म प्लानिंग कर रहे हो तो इस बारे में जरूर सोचना। तीसरा सी है कमर्शियल वैल्यू। हर इन्फ्लुएंसरर मार्केटर इक्वल पैसे नहीं कमाता है। एंड इवन एक फूड इंडस्ट्री का इन्फ्लुएंसरर मार्केटर जितना मर्जी ट्राई कर ले शायद ही वह कभी किसी फाइनेंस इंडस्ट्री वाले इन्फ्लुएंसरर मार्केटर को कमट कर पाएगा। रीज़न है इंडस्ट्री का मार्केट साइज एंड स्पेंडिंग पावर। या फिर अगर मैं इजी लैंग्वेज में कह दूं तो सीपीएम। आपकी अर्निंग सीधा-सीधा प्रोपोर्शनल होगी ब्रांड्स की अर्निंग से एंड क्रिएटर्स की अर्निंग के। यानी कि क्रिएटर अगर अच्छा अमाउंट नहीं कमा पा रहे हैं तो आप भी नहीं कमा पाओगे। तो ये चीज को आपको ध्यान में रखना है। अब कौन सी इंडस्ट्री सबसे ज्यादा बेनिफिशियल है इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग में? उनकी मैंने एक लिस्ट क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर में बना के सीपीएम के साथ आप लोगों को शेयर कर दी है। आप वीडियो को पॉज करके इसे देख भी सकते हो। इंडस्ट्री चूज़ करने के प्रोसेस में मैं आप लोगों को एक और सजेशन देना चाहूंगा। आप लोग जो भी इंडस्ट्री चूज़ करो, एक बार उस इंडस्ट्री के टॉप क्रिएटर विद इन इंडिया एंड विद इन फॉरेन को जरूर देखना। एंड यह भी देखना कि वह कितना कमा रहे हैं अपनी वीडियो से। एंड ब्रांड्स कितना पे करना चाह रही है उनको। यह चीज आपको मैनुअली करनी पड़ेगी। तभी आपको रियल इनेशन मिलेगी। आपकी इंडस्ट्री एक लॉन्ग टर्म कमिटमेंट होगा। तो आई विल रियली सजेस्ट कि इस प्रोसेस में कोई भी जल्दबाजी ना करें। नाउ एक बार आप लोगों ने एक इंडस्ट्री चूज़ कर ली। उसके बाद आपको जाना है सेकंड स्टेप पे जो कि है डिस्कवरिंग क्रिएटर्स। क्रिएटर्स ढूंढना सबसे आसान काम है इंडिया के अंदर। क्योंकि लिटरली इस मोमेंट पे हर दूसरा बंदा क्रिएटर ही है। एंड नियरली हर एक निश ओवर सैचुरेटेड है। क्रिएटर्स ढूंढने के दो वे हैं। पहला मैनुअल। आपने जो भी नीश या इंडस्ट्री चूज़ करी है, आपको उस इंडस्ट्री से रिलेटेड कीवर्ड Instagram या YouTube पे सर्च करने हैं। फॉर एग्जांपल, मान लीजिए आपकी इंडस्ट्री है फिटनेस। तो आपको बस Instagram पे जाना है एंड देन सर्च करना है फिटनेस कोच या फिर फिटनेस टिप एंड देन अकाउंट वाले सेक्शन में चले जाना है जहां पे हल्का सा स्क्रॉल करते ही आपको ऐसे अकाउंट दिख जाएंगे जिन पे अच्छे खासे व्यूज भी आ रहे हैं और ज्यादा ग्रो भी नहीं हुए हैं। लाइक 500 से लेके 500 के के बीच में ही है। इस रेंज के इन्फ्लुएंसर्स आपके लिए बेस्ट है। क्योंकि इन रेंज के इन्फ्लुएंसर्स के चार्जेस मीडियम होते हैं। एंड ये लोग अपनी ग्रोथ पे इतना फोकस होते हैं कि इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग जैसी चीजों के लिए इनके पास टाइम ही नहीं होता है। एंड इसी रेंज के इन्फ्लुएंसरर्स सबसे ज्यादा डेस्पिरेट भी होते हैं। ब्रांड डील्स के लिए क्योंकि इनकी अर्निंग का मेजर सोर्स ब्रांड डील्स ही होते हैं। एंड इनकी ग्रोथ भी उसी चीज पर डिपेंडेंट होती है। आपको ऐसे काफी सारे पेजेस एंड क्रिएटर्स मिल जाएंगे जिनकी आपको एक एक्चुअल शीट बना लेनी है विद नेम, नंबर ऑफ सब्सक्राइबर्स एंड एवरेज व्यू पर मंथ। मैनुअली क्रिएटर ढूंढने के काफी सारे तरीके हैं। फॉर एग्जांपल आप कीवर्ड सर्च करके टैग्स वाले सेक्शन में जा सकते हो। एंड देन आपको इतने सारे क्रिएटर मिलेंगे जो कि डिर्विंग है। अच्छे खासे व्यूज भी गेन कर रहे हैं लेकिन लोग उनको नहीं जानते हैं। या फिर वो ज्यादा ब्रांड डील्स क्रैक नहीं कर पा रहे हैं। यह आपके बेस्ट क्लाइंट्स हैं। आपको अपनी इंडस्ट्री के एटलीस्ट 30 से 50 ऐसे क्रिएटर की लिस्ट बना के रेडी रखनी चाहिए जो कि अभी मेगा इन्फ्लुएंसर्स भी नहीं है और नैनो इन्फ्लुएंसर्स भी नहीं है और इन लोगों की ग्रोथ कभी भी हो सकती है। सेम टेक्निक को आप YouTube एंड TikTok जैसे प्लेटफार्म पे भी यूज कर सकते हो। इसके बाद इन्फ्लुएंसरर ढूंढने का दूसरा तरीका है एi टूल्स की मदद से। ऑनलाइन ऐसे काफी सारे वेबसाइट्स हैं जो कि इन्फ्लुएंसर्स को ढूंढने का एंड उनके मैट्रिक्स को एक अच्छे वे में रिप्रेजेंट करने का काम करती है। उन्हीं में से कुछ वेबसाइट्स हैं हाइप ऑडिटर, इन्फ्लुएंसिटी एंड सोशल ब्लेड। ये तीनों ऐसी वेबसाइट्स हैं जिन पे आप लोकेशन, इंडस्ट्री, फॉलोअ साइज, एवरेज व्यूज ऐसे काफी सारे फिल्टर्स का यूज करके आप रियल टाइम डाटा निकाल सकते हो इन्फ्लुएंसर्स का। इवन इनमें से काफी सारे साइट्स आपको ईमेल भी निकाल के दे देती है इन्फ्लुएंसर्स का अपने प्रीमियम पैकेज के अंदर। अगर आप मास गियल पर काम करना चाहते हो या फिर एजेंसी स्टार्ट करना चाहते हो तो उस टाइम पर आपको इस तरह के एयर टूल काफी काम आएंगे। लेकिन अगर आप पर्सनल लेवल पर इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग करने वाले हो तो उस केस में मैं प्रेफर करूंगा कि आप मैनुअल वेयर को एडप्ट करें क्योंकि इससे आपको इंडस्ट्री की एक बेटर अंडरस्टैंडिंग भी मिलेगी कि यहां पे किस तरह के इन्फ्लुएंसर्स हैं एंड किस तरह का कंटेंट ब्रांड्स को पसंद आता है। इस सबके अलावा आपको एक चेक लिस्ट भी बनानी है। आपको मेक श्योर करना है कि जिन इन्फ्लुएंसरर्स के साथ आप काम करने वाले हो या फिर जिनको आप आउटरेच करने वाले हो वो इन चेक पॉइंट्स को कवर करें। सबसे पहला आपको मेक श्योर करना है कि क्रिएटर के पेज पे या चैनल पे फेक फॉलोअर्स ना हो या आप उनके पोस्ट या वीडियो की एंगेजमेंट देख के पता लगा सकते हो। सेकंड आपको ध्यान देना है कि वो क्रिएटर एक्टिव हो जिस पे एटलीस्ट 100 के मंथली व्यूज हो क्योंकि इससे कम पे मुश्किल यह है कि कोई ब्रांड आपके साथ काम करना चाहेगा। तीसरी चीज जिसका आपको ध्यान देना है कि वो क्रिएटर एक ट्रस्टवर्दी क्रिएटर हो और साथ ही पंक्चुअल भी हो। क्योंकि कई बार इन्फ्लुएंसरर मार्केटर्स ऐसे केस में फंस जाते हैं जहां वो डील तो करवा देते हैं लेकिन क्रिएटर इतना आलसी होता है कि वह ब्रांड को वीडियो बना के नहीं देता टाइमली एज अ रिजल्ट बीच में इन्फ्लुएंसरर मार्केटर फंस जाता है। एक बार आपके पास अच्छे क्रिएटर और इन्फ्लुएंसरर्स की लिस्ट सॉर्ट आउट हो जाए उसके बाद जाना है आपको अगले स्टेप पे जो कि है डिस्कवरिंग ब्रांड्स। अब ब्रांड्स पता लगाने के तीन तरीके हैं। सबसे पहला एनालाइजिंग कॉम्पिटिटर्स। अगर आपने फिटनेस को एज एन इंडस्ट्री चूज़ करा है तो आपको उस इंडस्ट्री के कंटेंट को कंज्यूम करना है। एंड आपको काफी सारे ऐसे रील्स या वीडियोस मिल जाएगी जिसके अंदर किसी ना किसी प्रोडक्ट को प्रमोट किया जा रहा है या डिस्प्ले किया जा रहा है। आपको उन कंपनीज़ के नाम नोट डाउन कर लेने हैं। एंड देन चैट GPT पे जाके या फिर किसी और टूल का इस्तेमाल करके उन कंपनीज़ के रीसेंट कॉम्पिटिटर्स को फाइंड आउट करना है एंड उनके भी नाम नोट डाउन कर लेने हैं। द रीज़न इज़ अगर एक कंपनी इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग पे खर्च कर रही है तो उसके कॉम्पिटिटर्स भी बहुत जल्दी इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पे खर्च करेंगे ही करेंगे क्योंकि कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता है। दूसरा तरीका है आप YouTube और Instagram पे हैशटग स्पोंसर या फिर हैशटग ऐड सर्च कर सकते हो जिससे कि आपको वो सारी वीडियोस एंड रील्स मिल जाएगी जिसके अंदर कुछ ना कुछ स्पों्सर्ड है। दैट मींस ब्रांड ने इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग पे खर्च किया है एंड फ्यूचर में भी करेंगे। तीसरा तरीका है कि आप अपनी इंडस्ट्री में कौन-कौन Google एड्स एंड Facebook एड्स रन कर रहा है इस चीज को भी नोटिस कर सकते हो। फॉर एग्जांपल, मेरी इंडस्ट्री में Samsung से लेके वंडर शेयर तक सब अपने एड्स रन करते हैं। एंड दैट्स व्हाई YouTube वीडियो स्टार्ट होने से पहले आपको वो एड्स देखने को मिलते हैं। अब जो कंपनी मार्केटिंग के लिए एड्स पे खर्च कर रही है, बहुत ज्यादा चांसेस है कि वो इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पे भी खर्च कर रही होगी। इन तीनों तरीकों का यूज़ करके आपको अपनी एक ब्रांड लिस्ट बना लेनी है। एंड यह लिस्ट जितनी लंबी होगी उतना अच्छा। एंड आल्सो आपको हर मंथ इस लिस्ट को अपडेट करते रहना होगा। क्योंकि आज के टाइम पे नियरली हर दूसरे दिन कोई ना कोई नया स्टार्टअप खुल रहा है। एंड वो लोग फंडिंग उठा के मार्केटिंग पे बहुत ज्यादा खर्च कर रहे हैं। तो अगर आप अपडेटेड रहोगे तो आपकी इनकम बढ़ेगी। अब अगला स्टेप है रीचिंग आउट। ओके। सो नाउ आपके पास क्रिएटर्स की लिस्ट रेडी है एंड ब्रांड्स की लिस्ट भी रेडी है जो कि इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग पे खर्च कर रहे हैं। नाउ आपको अपना काम स्टार्ट करना है। जिसके लिए आपको रीच आउट करना होगा दोनों तरफ। सबसे पहले आपको क्रिएटर को रीच आउट करना है उनके मेल पे एंड Instagram पे एंड उनको कुछ इस तरह का मैसेज भेजना है। सब्जेक्ट में आप लिख सकते हो क्रिएटर का नेम एक्स ब्रांड नेम कोलैबोरेशन या फिर आप कुछ ऐसा भी लिख सकते हो कोलैबोरेशन विद ब्रांड नेम। क्रिएटर्स के ईमेल एंड डीएम्स भरे होते हैं। तो आपको मेक श्योर करना है कि आपका ईमेल एटलीस्ट ओपन किया जाए। एंड उसके लिए सब्जेक्ट एक बहुत ही इंपॉर्टेंट पार्ट है। उसके बाद आते हैं मेन बॉडी पे। तो सबसे पहले तो आपको ग्रीटिंग्स एंड पर्सनल टच देना है जो कि आप कुछ इस वे में दे सकते हो। हेलो ट्यूब सेंसाई। आई हैव बीन फॉलोइंग योर कंटेंट ऑन YouTube एंड रियली लाइक द वे यू एंगेज योर ऑडियंस। द कम्युनिटी यू हैव बिल्ड अराउंड कंटेंट क्रिएशन नीश इज जेनुअली इंप्रेसिव। पर्सनल टेस्ट देने के बाद आपको खुद को इंट्रोड्यूस करना है कि आपने ईमेल किया क्यों है? एंड इस चीज को आप कुछ इस वे में लिख सकते हो। आई एम आपका नाम आ जाएगा यहां पे एन इन्फ्लुएंसरर मार्केटर हु कनेक्ट्स क्रिएटर्स विद ब्रांड्स। डेड मैच देयर ऑडियंस एंड वाइब हेल्पिंग देम सिक्योर हाई क्वालिटी पेड कोलैबोरेशंस। आई हैव रिसेंटली बीन वर्किंग विद ब्रांड्स लाइक। एंड यहां पे आपको दो-तीन ब्रांड्स के नाम लिख देने हैं। एंड अ फ्यू अदर इन योर निशेस एंड आई बिलीव यू वुड बी अ ग्रेट फिट फॉर सम ऑफ़ आवर अपकमिंग कैंपेन। अगर आप खुद को इस वे में इंट्रोड्यूस करोगे तो कोई भी पता नहीं लगा पाएगा कि आप एक बिगिनर हो। क्योंकि आपने अथॉरिटी बनाने के लिए एंड क्रिएटर को लालच देने के लिए कुछ अच्छे ब्रांड्स के नाम वहां पे लिखे होंगे जो कि आपने अपनी रिसर्च के टाइम ढूंढे थे। लेकिन मेक श्योर कि आपने जो ब्रांड्स के नाम वहां पे लिखे हैं, क्रिएटर ने उनके साथ पहले कोलैब ना किया हो। वरना आपकी सारी मेहनत बेकार चली जाएगी। नाउ यह लिखने के बाद आपको कन्वर्सेशन को थोड़ा सीरियस करना है एंड थोड़ी डिटेल्स निकालनी है जो कि आप यह लिख के कर सकते हो। इफ यू आर ओपन टू इट प्लीज लेट मी नो योर चार्जेस फॉर एन इंटीग्रेटेड वीडियो डेडिकेटेड वीडियो एंड Instagram रील्स आल्सो सो दैट आई कैन शेयर द रेलेवेंट कैंपेन डिटेल्स अकॉर्डिंगली। नाउ ये लिखने से दो चीजें होगी। एक तो आपको क्रिएटर के रेट्स पता चल जाएंगे। एंड दूसरा अगर क्रिएटर इंटरेस्टेड नहीं होगा तो आपके ईमेल को इग्नोर कर देगा जिससे कि फ्यूचर में आपका ही टाइम बचेगा। नाउ फाइनली आपको ईमेल को क्लोज करना है एक प्रोफेशनल वे में। कुछ ऐसा लिख के लुकिंग फॉरवर्ड टू कोलबोरेटिंग एंड क्रिएटिंग समथिंग एक्साइटिंग टुगेदर। बेस्ट रिगार्ड्स योर नेम एंड फिर आप चाहो तो अपना WhatsApp नंबर, ईमेल या फिर वेबसाइट या Lindin कुछ भी दे सकते हो यहां पे। यह एक परफेक्ट वे है किसी भी क्रिएटर को रीच आउट करने का। जहां पे आपने पहले ट्रस्ट बिल्ड किया, फिर अथॉरिटी बिल्ड करी एंड देन क्रिएटर को एक सीटीए भी दे दिया काम करने के लिए। नाउ आपको ऐसे ईमेल 10 अलग-अलग क्रिएटर्स को भेजने हैं डेली। या कह लो तब तक जब तक आपको पांच क्रिएटर की तरफ से रिस्पांस ना आ जाए। अगर आपको पांच क्रिएटर्स की तरफ से रिस्पांस आ गया है तो मैं प्रेफर करूंगा कि उस मोमेंट पे रुक जाना। क्योंकि स्टार्टिंग में आप ज्यादा क्रिएटर्स को मैनेज नहीं कर पाओगे। आपको मुश्किल होगी। नाउ इस ईमेल के बाद होगा यह कि क्रिएटर आपको रिप्लाई बैक करेगा एंड अपने कुछ रेट्स बताएगा वीडियो के। जिसके बाद आपको कन्वर्सेशन को कंटिन्यू करना है यह बोल के। हे देन उसके बाद क्रिएटर का नेम थैंक्स फॉर गेटिंग बैक टू मी एंड शेयरिंग योर रेट्स। रियली अप्रिशिएट दैट आई विल रिव्यू देम एंड डिस्कस विद द ब्रांड्स। वंस आई हैव कन्फर्म द ब्रीफ एंड डिलीवरबल्स। आई विल शेयर ऑल दी डिटेल्स इंक्लूडिंग द ब्रांड कॉन्सेप्ट एंड टाइमलाइन्स। सो वी कैन टेक दिस फॉरवर्ड स्मूथली। लुकिंग फॉरवर्ड टू कोलैबोरेटिंग ऑन समथिंग इम्पैक्टफुल सून। बेस्ट योर नेम। इस रिप्लाई के बाद क्रिएटर श्योर हो जाएगा कि आप उसके लिए ब्रांड डील लाने वाले हो। एंड अब वह आपका वेट करेगा। अब इस मोमेंट के बाद आपको ब्रांड को रीच आउट करना है। लेकिन उससे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि ब्रांड को रीच आउट करना कहां पे है? तो जब आप अपने ब्रांड्स की लिस्ट बना रहे थे, उस मोमेंट पे आपको एक और कॉलम भी बनाना है। जहां पे आपको उस ब्रांड के सपोर्ट ईमेल एंड साथ ही मार्केटिंग टीम के ईमेल्स को भी लिखना है। यह ईमेल्स आपको Lindin पे ही मिल जाएंगे। आपको Lindin पे जाके सबसे पहले तो ब्रांड के नेम को सर्च करना है। जिसके बाद आपको कंपनी वाले फिल्टर को ऑन कर देना है। एंड ऐसा करते ही आपको ब्रांड्स के ऑफिशियल Lindin अकाउंट्स मिल जाएंगे। जिस पे अगर आप जाओगे तो वहां पे एक सेक्शन होगा पीपल का। आपको उस पे जाना है। एंड देन आपको उस कंपनी के अंदर वर्क कर रहे सभीेंट मेंबर्स दिख जाएंगे। आपको उनमें से मार्केटिंग हेड या फिर इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग हेड या फिर किसी भी ऐसे बंदे को ढूंढना है जो मार्केटिंग डिपार्टमेंट में है। एंड देन उनके ईमेल को एक्सट्रैक्ट करना है। ईमेल आप किसी भी एक्सटेंशन का यूज़ करके निकाल सकते हो। जैसे कि स्कrap.io। ऐसे आपके पास डायरेक्ट कांटेक्ट होगा ब्रांड की मार्केटिंग टीम का। नाउ ईमेल आपके पास रेडी है तो मैसेज भी तैयार कर ही लेते हैं। ब्रांड के पास आप एज एन इन्फ्लुएंसरर मार्केटर नहीं जा सकते। क्योंकि अगर आप ऐसा करते हो तो ब्रांड आपको साइड में फेंक के खुद ही क्रिएटर के साथ डील कर लेगा या फिर आपको टोटली इग्नोर ही कर देगा। ब्रांड इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग एजेंसीज के साथ काम करती है। किसी सोलो इन्फ्लुएंसरर मार्केटर के साथ नहीं। इसलिए आपको खुद को एज अ मैनेजर प्रेजेंट करना है क्रिएटर का। एंड देन रीच आउट करना है ब्रांड को कुछ इस वे में। हाय ब्रांड का नेम या फिर मैनेजर का नेम आई एम। फिर आपका नेम, द ब्रांड पार्टनरशिप मैनेजर ऑफ फिर क्रिएटर का नेम, वन ऑफ द लीडिंग क्रिएटर इन द फिर आपको यहां पे नीश के बारे में बात करनी है। विन एन ऑडियंस ओवर देन आपको फॉलोअर्स बताने हैं एंड कंसिस्टेंटली स्ट्रांग एंगेजमेंट। वी हैव बीन फॉलोइंग योर ब्रांड एंड रियली लाइक्ड योर रिसेंट कैंपेन अराउंड। अब यहां पे देख लेना कि ब्रांड रिसेंटली किस चीज से रिलेटेड प्रमोशन कर रहा है। आई थिंक देयर इज़ अ ग्रेट फिट बिटवीन योर ब्रांड एंड आवर ऑडियंस व्हिच कंसिस्ट ऑफ। एंड यहां पे फिर आपको अपनी ऑडियंस को एक्सप्लेन करना है। वी आर करेंटली फाइनलाइजिंग आवर नेक्स्ट सेट ऑफ ब्रांड पार्टनरशिप फॉर दिस मंथ। और यहां पे फिर से अगेन ब्रांड का नेम फील्स लाइक अ स्ट्रांग फिट कंसीडरिंग योर पोजीशन एंड टारगेट ऑडियंस। प्लीज लेट अस नो इफ दिस इज समथिंग यू वुड बी इंटरेस्टेड इन। लुकिंग फॉरवर्ड टू हियर फ्रॉम यू। बेस्ट योर नेम। अगर आप ब्रांड को ऐसा मैसेज भेजोगे तो आप खुद को टीम के एक मेंबर की तरह प्रेजेंट करोगे ना कि किसी मिडिल मैन की तरह। एंड ब्रांड को भी लगेगा कि आप लोग एक्चुअल में अवेयर हो उनके इंटरेस्ट के साथ एंड डिजायर्ड गोल के साथ। एंड इस टेंपलेट से आपके रिप्लाई के चांसेस काफी ज्यादा बढ़ जाएंगे। आपको ऐसे ईमेल कस्टमाइज करके डेली सर्टेन नंबर ऑफ ब्रांड्स को भेजना है। अगर आप एक ही बार में बहुत सारे ईमेल्स करोगे तो आपके ईमेल स्पैम में जाने लगेंगे एंड ब्रांड्स तक नहीं पहुंचेंगे। इसलिए प्रेफरेबल है कि आप डेली 10 ब्रांड्स को ही ईमेल सेंड करना। नाउ रीच आउट करने के बाद आएगा अगला स्टेज जो कि है नेगोशिएशन। ओके। सो, आपके प्रीवियस ईमेल के बाद ब्रांड आपको रिप्लाई देगा एंड आपसे आपके रेट पूछेगा। आपको वही रेट देने हैं जो कि क्रिएटर ने आपको दिए थे। आपको अपना मार्जिन यहां पे ऐड नहीं करना है। रीज़न मैं आगे बताऊंगा। इसके बाद ब्रांड मेबी क्रिएटर के स्टैट्स मांगेगा। आप क्रिएटर से वो चीज मांग के ब्रांड को सेंड कर देना। एंड देन एक फाइनल प्राइस डिस्कस होने के बाद ब्रांड आपको अपने कैंपेन के ब्रीफ सेंड करेगा एंड साथ ही कॉन्ट्रैक्ट भी सेंड करेगा जिसमें प्राइिंग एंड बाकी सारी चीजें लिखी होती है। यह चीज आपको क्रिएटर को सेंड करनी है एंड देन क्रिएटर कंटेंट बनाना स्टार्ट करेगा। नाउ अगर आप किसी ट्रस्टेड ब्रांड के साथ काम कर रहे होंगे तो इस मोमेंट तक आपको ब्रांड हाफ पेमेंट भेज चुका होगा। जिसके लिए वो इनवॉइस एंड बैंकिंग डिटेल्स भी मांगेगा। आपको क्रिएटर से लेके वो चीजें फॉरवर्ड कर देनी है। एंड देन वीडियो पब्लिश होने के बाद पूरी पेमेंट भेज दी जाएगी क्रिएटर को। नाउ आई नो आप लोग सोच रहे होंगे कि इस सब में मेरा क्या फायदा मैंने कहां पर कमाया?वेल आपने नहीं कमाया। एंड यही वो चीज है जो मैं आप लोगों को सिखाना चाहता हूं। इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग एक ऐसा बिजनेस है जो कि ट्रस्ट के बेसिस पर चलता है। अगर क्रिएटर का आप पे ट्रस्ट नहीं है तो आप कभी भी लॉन्ग टर्म गेम नहीं खेल पाओगे। इसलिए क्रिएटर के ट्रस्ट को जीतने के लिए प्रेफरेबल है कि आप एक ब्रांडल उसे बिना कमीशन लिए ही दिला दो। जिससे कि उसे रियलाइज हो जाएगा कि यह बंदा काम का भी है और ट्रस्टवर्दी भी है। क्योंकि इसने अपनी सारी चीजें ट्रांसपेरेंट रखी है। नाउ यहां से आपकी असली गेम स्टार्ट होगी। जब क्रिएटर को एक ब्रांड डील मिल चुकी होगी तो आप उसके साथ दोस्ती कर सकते हो एंड वो भी इंटरेस्टेड होगा इस चीज में। एंड देन आपको अपनी सर्विज को पिच करना है। आपको क्रिएटर को यह रियलाइज करवाना है कि आपके पास ऐसे और भी बहुत सारे ब्रांड्स हैं जो कि इनसे ज्यादा पे करने के लिए तैयार हैं। लेकिन अगर आप उस क्रिएटर के लिए ब्रांड्स लाओगे तो आप कमीशन लोगे जो कि 10 से लेके 30% के बीच में कुछ भी हो सकता है। यह स्टैंडर्ड मार्केट प्राइस है। सिंस क्रिएटर को पता होगा कि सारा काम ट्रांसपेरेंट रहने वाला है एंड आप उसके पैसे लेके नहीं भागने वाले हो तो वो मान जाएगा। नाउ फाइनली आप एक ऐसे इन्फ्लुएंसरर मार्केटर होंगे जिसके पास एक क्रिएटर होगा एंड आप सिर्फ उस क्रिएटर से ही काफी ज्यादा कमीशन कमा लोगे। जब आप उस क्रिएटर को तीन-चार ब्रांड डील्स करवा दो देन आप उससे उसके दोस्तों कांटेक्ट भी मांग सकते हो एंड उनको भी ऑनबोर्ड कर सकते हो। अगर आप सिर्फ एक ही ब्रांड की डील पांच अलग-अलग क्रिएटर से भी करवाते हो तो आपकी अर्निंग फाइव टाइम्स इनक्रीस हो जाएगी। एंड इन दिस वे यू विल स्टार्ट ग्रोइंग। यह सारा काम ट्रस्ट एंड वे ऑफ कम्युनिकेशन पे ही डिपेंडेंट है। एंड यह चीजें आपको खुद ही देखनी पड़ेगी। यह मैं आपको सिखा नहीं सकता। नाउ यह था एक नॉर्मल प्रोसीजर इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग स्टार्ट करने का एंड अर्निंग स्टार्ट करने का। लेकिन अगर मैं सच कहूं तो आप इस वे में इनफ्लुएंसरर मार्केटिंग करके महीने के कुछ ज्यादा अमाउंट नहीं कमा पाओगे। अंटिल आप बहुत ही बड़े क्रिएटर्स के साथ काम करना ना स्टार्ट कर दो। तो क्वेश्चन आता है कि ये बड़े-बड़े इन्फ्लुएंसरर मार्केटर्स करोड़ों में कैसे कमाते हैं? इसका जवाब है एजेंसी से। और एजेंसी कैसे स्टार्ट करें?वो भी मैं आपको बता देता हूं। स्टार्टिंग आईएमए। अगर आप इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग में घुसे हो तो आज नहीं तो कल आपको एक एजेंसी स्टार्ट करनी ही पड़ेगी। द रीज़न इज कि आप सिर्फ एक ही ब्रांड को 10 अलग-अलग क्रिएटर के लिए 10 अलग-अलग मेल्स भेज के सिर्फ टाइम वेस्ट करोगे एंड ज्यादा कमीशन भी नहीं बना पाओगे। वहीं एक इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग एजेंसी बजाय वन टाइम कोलैबोरेशन के पीछे भागने के या फिर क्रिएटर्स पे डिपेंडेंट होने के वो सीधा ब्रांड से डील करती है। इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग एजेंसी टेक्निकली एक बी टू बी बिज़नेस में कन्वर्ट हो जाता है। जहां पे आप ब्रांड्स को उनके लिए जो बेस्ट है वो ला के देते हो। पर्सनल लेवल पे आपको पहले क्रिएटर का फायदा देखना पड़ता था। क्योंकि क्रिएटर का फायदा होता तभी आप कमा पाते। लेकिन एजेंसी लेवल पर आपको ब्रांड का फायदा देखना है। तभी आप यहां पर लॉन्ग टर्म गेम खेल पाओगे। इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग एजेंसी किस वे में वर्क करती है? मैं बस आपको उसका एक ओवरव्यू दे देता हूं। सबसे पहले इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग एजेंसीज के पास क्रिएटर्स भरे पड़े होते हैं। एंड छोटे-मोटे नहीं बड़े-बड़े क्रिएटर्स लाइक फुकरा इंसान या फिर कह लो प्रजक्ता कोहली जो कि मैक क्रिएटर्स की कैटेगरी में आते हैं। सेकंडली आईएमएस उन ब्रांड्स के साथ तो वर्क करती ही है जो कि पहले से इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग कर रही थी। लेकिन इसके सिवाय वो उन ब्रांड्स को भी रीच आउट करते हैं जो कि कमा तो रहे हैं लेकिन इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग पर खर्च नहीं कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि वो लोग हिडन कंपनीज़ को भी फाइंड आउट करते हैं एंड उनको अपने क्लाइंट्स में कन्वर्ट करते हैं। एंड बजाय नॉर्मल वन टाइम कोलैबोरेशन के इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग एजेंसीज कैंपेन रन करती है। यानी कि ब्रांड्स के साथ एक डील होती है। उनको एक सर्टेन नंबर ऑफ व्यूज और सेल्स या रिवन्यू चाहिए होता है। जिसके लिए उनके पास एक सर्टेन अमाउंट ऑफ बजट होता है। एंड एक सर्टेन अमाउंट ऑफ टाइम पीरियड भी होता है। एंड इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग एजेंसी का काम होता है कि वह अपने अकॉर्डिंग इन्फ्लुएंसरर को सेलेक्ट करें। किसी इन्फ्लुएंसरर कोलैबोरेशन के लिए बोलना है, कितनी वीडियोस के लिए बोलना है, कहां से रिजल्ट मिल रहे हैं, कहां पे ज्यादा इन्वेस्ट करना है एंड कहां पे नहीं करना है, यह सारा काम इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग एजेंसी करती है। टेक्निकली वन टाइम डील की जगह यह लोग एक लॉन्ग टर्म गेम खेलते हैं जो कि 6 महीने से 8 महीने तक चलती है। एंड इसके लिए बजट भी अच्छा खासा मिलता है। लाइक मैं यहां लिटरली में करोड़ों की बात कर रहा हूं। जिसमें से एजेंसीज अपना मार्जिन साइड करती है एंड बचे हुए पैसों को इन्फ्लुएंसर्स के बीच में बांट देती है। दिस इज हाउ एजेंसी वर्क्स। एंड एजेंसी स्टार्ट करने से पहले इस फील्ड की नॉलेज होना बहुत ही जरूरी है। क्योंकि एजेंसी स्टार्ट करने के बाद आप व्यूज, एंगेजमेंट, डेमोग्राफिक्स जैसे मैट्रिक्स को स्टडी नहीं करोगे बल्कि आपको रिवन्यू, बजटिंग, सेल्स ऐसे मैट्रिक्स के बारे में बात करनी पड़ेगी। एंड साथ ही आपको लीगल कॉन्ट्रैक्ट्स वगैरह का भी ध्यान रखना पड़ेगा जो कि ब्रांड्स के साइड से भी होगा और इन्फ्लुएंसरर के साइड से भी। लेकिन यह सब मैनेजेबल है। उतना हार्ड नहीं है। इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग एजेंसी खुद में एक बहुत ही बड़ी गेम है जिसके ऊपर अगर आपको वीडियो चाहिए तो कमेंट सेक्शन में एजेंसी लिख दीजिए। अगर मुझे 5000 ऐसे कमेंट्स आते हैं तो मैं इसके ऊपर वीडियो जरूर बनाऊंगा। नाउ यह थी वो सारी इनफेशन जो आपको पता होनी चाहिए इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग स्टार्ट करने से पहले। अगर आप एक पर्सनल लेवल पर सिर्फ पांच ही क्रिएटर्स के साथ भी एक साल भी काम कर लेते हो तो आप अच्छा खासा कमाना स्टार्ट कर दोगे। लेकिन अगर आप लोगों को यह बिज़नेस मॉडल पसंद नहीं आया है और आप कोई और साइड हसल देखना चाहते हो तो आप लोग मेरी इस वाली वीडियो को देख सकते हो। इसके अंदर मैंने 20 इनकम स्ट्रीम्स को शेयर करा है जो कि अभी के टाइम पर सबसे रेलेवेंट भी है और काम की भी है।

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